10 डिक्टेशन(हिंदी माध्याम) का कैपसूल-2

प्रिय मित्रों, एस०एस०सी० स्‍टेनोग्राफर ग्रेड ‘सी’ और ‘डी’ परीक्षा, 2017 की कौशल-परीक्षा को दृष्‍टि में रखते हुए एक बार फिर 10 डिक्‍टेशन का एक संकलन (कैपसूल) आपके लिए प्रस्‍तुत कर रहे हैं।

हमने इसमें उन सभी प्रकार की डिक्‍टेशन को शामिल करने की कोशिश की है जो परीक्षा की दृष्‍टि से अतिमहत्‍वपूर्ण है। उम्‍मीद हैं आपको पसंद आएगा।

आपकी प्रतिक्रियाओं/सुझावों की हमें प्रतिक्षा रहेगी।

 

शुभकामनाओं सहित।

 

-टीम शॉर्टहैंड ऑनलाइन

Download C-2

डिक्‍टेशन-1

उपाध्यक्ष महोदय, आपने मुझे इस विषय पर बोलने का मौका दिया, इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। हम दो दिन से इस विषय पर चर्चा करना चाहते थे, लेकिन किसी न किसी वजह से इस चर्चा को ठुकराया गया। इस कारण यह चर्चा कल और आज सुबह नहीं हो सकी। इस चर्चा में हम यह नहीं कहना चाहते कि कालेधन की समस्या केवल आज या छः महीने ही पुरानी है। इस बारे में मैंने पढ़ा है और पुरानी बहस में भी देखा है कि स्वतंत्रता मिलने के बाद से लेकर अब तक काले धन पर किसी न किसी ढंग से चर्चा चलती रही है। चाहे इस सदन में चर्चा न हुई हो, लेकिन सदन से बाहर इस बारे में हर राजनीतिक पार्टी के लोग बात करते आये हैं, हर नेता इस बारे में बात करता है। खासकर वर्ष 2010-11 में इस विषय को ज्यादा प्रचार मिला। उस वक्त इस सदन में बी0जे0पी0 के वरिष्ठ नेता श्री लाल कृष्ण आडवाणी ने 14 दिसम्बर, 2011 को इस विषय को बहुत गंभीरता से प्रस्तुत किया था।

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, एक बहुत गंभीर मुद्दे पर आज फिर एक बार सदन चर्चा कर रहा है। 14 दिसम्बर, 2011 को लगभग तीन वर्ष पहले इसी सदन में इस विषय पर चर्चा हुई। आडवाणी जी ने उस समय इस चर्चा की शुरूआत की और भारतीय जनता पार्टी की ओर से मुझे और आडवाणी जी को बोलने का अवसर मिला। प्रणब जी जो उस समय के वित्त मंत्री थे, उन्होंने सदन में उस समय अपनी सरकार को बचाने के लिए बड़ा प्रयास किया और उत्तर दिया था। एक महत्वपूर्ण प्रश्न है कि देश में काला धन आखिर वापस क्यों आए। जो कमाई देश के अंदर होती है, उसका टैक्स जब जमा नहीं कराया जाता और आपके खजाने में पैसा आने के बजाय बाहर जाता है तो आपको पहला सबसे बड़ा नुकसान वह होता है। दूसरा, देश के विकास कार्यों पर जब वह पैसा नहीं लगता तो विकास में भी कमी आती है और रोज़गार में भी कमी आती है। तीसरा, उसी पैसे का दुरुपयोग आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए देशी और विदेशी ताकतों द्वारा किया जाता है।

काला धन गंभीर मुद्दा है। आडवाणी जी ने इस मुद्दे पर देश भर की यात्रा भी की, देश में जागरूकता फैलाने का प्रयास भी किया, और काश! पिछले दो दिनों से मेरे जो मित्र यहां आकर लगातार हल्ला-गुल्ला कर रहे थे, जब पिछले पाँच से दस वर्ष वे सत्ता में थे, तब उन्होंने सही कदम उठाया होता तो आज मैं यहां खड़ा होकर आपकी चर्चा का उत्तर नहीं दे रहा होता। काश! पिछले पाँच वर्षों में जो घोटाले करके आपने हिन्दुस्तान को खोखला कर दिया, हिन्दुस्तान का पैसा खाकर आपने देश को खोखला कर दिया, खजाने में पैसा आने के बजाय वह व्यक्तिगत जेबों में जाना शुरू हो गया, तो यह अपने आप में दिखता है कि किस तरह से जनता ने उनको मात्र 44 सीटों पर सीमित करके रख दिया है। मैं केवल इतना कहना चाहता हूं कि भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणापत्र में क्या कहा था। ब्लैक मनी पर हमने क्या कहा था, आपने हमारा घोषणापत्र नहीं पढ़ा होगा, आपके लिए पढ़कर सुना देता हूं।//517//

डिक्‍टेशन-2

उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपको धन्यवाद देती हूं। आपके माध्यम से मैं सभी माननीय सांसदों का धन्यवाद देना चाहूंगी, जिन्होंने इस बिल पर अपने विचारों को व्यक्त किया। मैं इस सदन में एक विशेष आभार अपने वरिष्ठों की अनुमति से व्यक्त करना चाहती हूं। श्री मल्लिकार्जुन खड़गे जी एक वरिष्ठ नेता हैं, इनका भारत की राजनीति में एक सुनहरा इतिहास है और आज मुझ पर व्यक्तिगत कटाक्ष करने के लिए इन्होंने संत तुकाराम का उल्लेख किया, मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मुझ जैसी एक छोटी सी महिला के लिए इतने बड़े संत का नाम आपकी जुबान पर आया। लेकिन मेरे पास न उनकी तरह अनुभव है और न मैं वरिष्ठ हूं, लेकिन विद्या के बारे में मैंने जो समझा, सीखा और जाना है, वह मात्र इतना है कि ‘विद्या ददाति विनयम्’ और उस विनय का परिचय देते हुए मैं मात्र इतना कहना चाहती हूं कि आज का यह अमैंडमैन्ट बिल जो हम पास करने वाले हैं, वह अपने आपमें इस बात का प्रमाण है कि लोकतंत्र में कितनी ताकत होती है। पिछले तीन सालों से बिहार की विधान परिषद, विधान सभा और बिहार की जनता एकजुट होकर संघर्ष कर रही थी और बार-बार भारत सरकार से कह रही थी कि मोतिहारी में एक विश्वविद्यालय हो और उसका नाम महात्मा गांधी के नाम पर रखा जाए। यह दिया हमने, लेकिन मैं बहुत विनम्रता के साथ कहना चाहती हूं कि यह अहंकार का परिचय नहीं दे रहे हैं, उस लोकतंत्र की आवाज को जो बिहार से उभरी, उसे आज इस सदन में हम सशक्त कर रहे हैं कि जब जनता संसद के दरवाजे तक आकर दस्तक देती है और अगर सरकार उस दस्तक को नहीं सुनती तो यह जनता उस सरकार को पलटने की भी ताकत रखती है।

इसके अलावा किशनगंज में अल्पसंख्यकों के लिए जो सबसे महत्वपूर्ण ए.एम.यू. की शाखा खोली गई है, उसमें आप कितनी राशि दे रहे हैं और जिस केन्द्रीय विश्वविद्यालय महात्मा गांधी, चम्पारण विश्वविद्यालय के बारे में यहां कहा जा रहा है, उस विश्वविद्यालय को बनाने के लिए आप कितनी राशि दे रहे हैं। वहां जो उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षकों का वहां प्रवेश होगा, आज जिस तरीके की एजूकेशन बिहार में है, क्या उसी तरह की एजूकेशऩ की स्थिति केन्द्रीय विश्वविद्यालय़ में होगी, यह मैं आपसे कहना चाहूंगा।

अंत में मैं आपसे कहना चाहूंगा कि नालंदा के विश्वविद्यालय के लिए आप धनराशि दे और जो गया के केन्द्रीय विश्वविद्यालय की स्थिति है, उस पर आप विशेष रूप से ध्यान दें।

डिक्‍टेशन-3

उपाध्यक्ष महोदय, मैं इस विधेयक के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। मैं सबसे पहले भारत-रत्न डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को नमन करता हूं। उन्होंने भारत में सामाजिक न्‍याय के बारे में जो कुछ त्रुटियां थी,लोगों को सामाजिक न्याय दिलवाने के लिए जो अहम कार्य किया है,मैं समझता हूं कि पूरी दुनिया के इतिहास में ऐसा कार्य किसी ने नहीं किया है। बाबासाहेब अम्बेडकर को नमन करके मैं अपनी बात की शुरुआत करता हूं। बाबासाहेब अम्बेडकर ने न सिर्फ दलितों के लिए काम किया है,बल्कि उन्होंने पूरे शोषित वर्ग के लिए किया है। चाहे वे वनवासी लोग हों,पिछड़े लोग हों,महिलाएं हों या लेबर क्लास हो। बाबासाहेब अम्बेडकर ने शोषित एवं वंचित लोगों के लिए भी बहुत कुछ किया है। उन्होंने सभी को न्याय दिलाया है,इसी वजह से भारत का लोकतंत्र और भी मजबूत होकर उभरा है। जहां तक अनुसूचित जातियों का सवाल है,अनुसूचित जातियों को आरक्षण देने का जो सबसे पहला मानदंड है,वह अस्पृश्यता है और यह एक ऐसी चीज है,जिसकी वजह से सामाजिक,शैक्षणिक और आर्थिक पिछड़ापन आता है। इसी वजह से अनुसूचित जातियों के वर्गों को आरक्षण दिया जाता है।   अभी मेरे कांग्रेस के मित्र वोट बैंक की बात कर रहे थे। मैं इनकी बात से सहमत हूं कि हमें आरक्षण के संबंध में कतई वोट बैंक की राजनीति नहीं करनी चाहिए। मुझे स्मरण आता है कि यूपीए की सरकार के वक्त पर दलितों को आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए रंगनाथ आयोग का गठन किया गया था। उसका उद्देश्य यह था कि जो लोग दलित होते हैं,उनको आरक्षण का लाभ दिलाना। मैं स्पष्ट रूप से समझता हूँ कि बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर जी ने अपने संविधान में लिखा है,उन्होंने संविधान में प्रावधान किया है जिसे भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जी से लेकर सभी प्रधानमंत्रियों ने अनुमोदन दिया है। अनुसूचित जाति के वर्गों में आने के लिए अस्पृश्यता अहम चीज है,इसीलिए अस्पृश्यता के मानदंड को लिया जाना चाहिए। इसमें कतई राजनीति नहीं करनी चाहिए।

उपाध्यक्ष महोदय, पिछली लोक सभा में भी हमने आपके सामने यह विषय रखा था कि उत्तर प्रदेश में 17 जातियां ऐसी हैं, जो सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक दृष्टि से बहुत पिछड़ गयी हैं। यहां तक कि उनके पास छप्पर वाले घर-मकान भी नहीं हैं। ये सारी 17 जातियां मजदूरी करती हैं। इस संबंध में उत्तर प्रदेश विधान सभा में सर्वसम्मति से दो बार प्रस्ताव पास हुए और यहां केन्द्र सरकार तक आए। उस समय संसदीय कार्य मंत्री थे, उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया था कि हम इस पर स्वीकृति ले लेंगे, इसे कैबिनेट में ले जाएंगे और इसे पास कर देंगे। लेकिन फिर लोक सभा का चुनाव आ गया, आचार संहिता लग गयी और वह काम नहीं हो सका। आज पुनः आपके सामने मैं अनुरोध कर रहा हूं और पूरे सदन से प्रार्थना कर रहा हूं कि ये जातियां बहुत पिछड़ी हैं, बहुत गरीब हैं और गरीब होती चली जा रही हैं, उनके पास खेती भी नहीं है, इसलिए इन जातियों को अनुसूचित जातियों में शामिल किया जाए जिससे उनको सारी सुविधाएं प्राप्त हों।

उपाध्यक्ष महोदय,इनमें से कुछ जातियों को अन्य सूबों में अनुसूचित जाति की सुविधा प्राप्त है। मध्य प्रदेश में प्रजापति जाति को अनुसूचित जाति मान लिया गया है और उनको उसकी सारी सुविधाएं वहां प्राप्त हो रही हैं। इसलिए मैं सदन से,सभी नेताओं से एवं सभी सांसद साथियों से प्रार्थना करता हूं कि सर्वसम्मति से इसको पास कर दीजिए और सरकार से कहिए। प्रधान मंत्री जी से मिल लेंगे। यहां संसदीय कार्य मंत्री जी अभी नहीं हैं। जब कमलनाथ जी थे,उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया था। मेरा निवेदन है कि ये 17 जातियां हर तरह से परेशान हैं,इनको मजदूरी भी नहीं मिलती है,घर-मकान,पढ़ाई-शिक्षा,नौकरी-रोजगार कुछ भी नहीं है। इसलिए इनको अनुसूचित जातियों में शामिल कर दिया जाए,जिससे उनको अनुसूचित जाति की सुविधा मिले।//612//

डिक्‍टेशन-4

उपाध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने के लिए समय दिया, इसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूँ। यह बहुत ही महत्वपूर्ण और गंभीर मामला है। पिछले चुनाव में प्रधान मंत्री जी ने पूरे देश में घूम-घूमकर चुनाव प्रचार के दौरान काला धन वापस लाने का नारा दिया था। जनता ने आप पर आंख मूंद कर भरोसा किया। आपके प्रचार के दौरान देश की जनता ने विश्वास किया। उसी का परिणाम है कि आपकी स्पष्ट बहुमत की सरकार बनी। आपने काला धन वापस लाने का जो नारा दिया था। जनता ने आप पर भरोसा किया और आपको सत्ता भी सौंप दी।

सभापति महोदय, सरकार बनने के बाद आज तक सरकार ने, मोदी जी ने इसमें कोई भी प्रभावी कार्य नहीं किया गया, न सरकार ने अभी तक कोई विचार किया है, न अभी सदन को या देश को कुछ बताया है, जो आपने चुनाव के वक्त कहा था। कांग्रेस सरकार ने स्विज़रलैण्ड से एक समझौता किया था। काले धन की जानकारी प्रदान करने के लिए उस समझौते पर छह महीने तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब तक ज्यादा से ज्यादा काला धन बैंको से निकाल लिया गया। अभी भी आपकी सरकार ने बयान दिए। प्रधान मंत्री जी ने बयान दे दिए और सरकार की तरफ से बयान दिए गए। इस बीच में काफी रूपया बड़ी तादात में बैंको से निकाल लिया गया। क्या इस सरकार ने जानने की कोशिश की है कि यह जो रूपया निकाला गया, वह कहां गया? इस धन को निकालने वाले कौन-कौन थे? संसदीय कार्य मंत्री जी क्या आपके पास सूची है? क्या आपके पास जानकारी है? वह जानकारी सदन को जरूर चाहिए कि किन-किन लोगों ने रूपया निकाला और कितना रूपया निकाला? सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर जो सूची दी गई है, क्या वह संपूर्ण है? यदि सूची पूरी नहीं है तो कब तक पूरी सूची प्रकाश में आएगी? सरकार की तरफ से इस पर जवाब आना चाहिए। क्या इस बात का आंकलन किया गया है कि दुनिया भर में भारतीयों का कितना धन कहां-कहां गया है और किसका है?

उपाध्यक्ष महोदय, मेरे संसदीय क्षेत्र में खनिज संपदा, यथा बाक्साइट, चूना-पत्थर एवं अब्रकी एरेनाइट के पाये जाने की खबर है। खान मंत्रालय द्वारा जांच उपरान्त यह संज्ञान में आया है। परन्तु उक्त खनिज संपदा की भूमि वन क्षेत्र के अन्तर्गत होने के कारण, खनिज संपदा के खनन कार्य में रुकावट आ गई है, जिसे वन क्षेत्र से मुक्त कराने हेतु, मैंने खनन मंत्रालय तथा वन मंत्रालय से अनुरोध भी किया था, परन्तु अभी तक कोई भी कार्रवाई नही की गई है। इस क्षेत्र में अति पिछड़े लोग बसे हुए हैं तथा यहां गरीबी भी चरम सीमा पर है।

अतः उपाध्यक्ष महोदय, हमारा आपके माध्यम से विशेष अनुरोध है कि उपर्युक्त खनिज संपदा के खनन हेतु, वन क्षेत्र से उन्हें मुक्त कराने के लिए, संबंधित मंत्रालय को निर्देशित करने की कृपा की जाए, जिससे सरकारी राजस्व के साथ-साथ इस क्षेत्र के लोगों को भी रोजगार मिल सके तथा यहां की गरीबी पर कुछ हद तक काबू पाया जा सके। धन्यवाद //492//

 डिक्‍टेशन-5

उपाध्यक्ष महोदय, आपने मुझे पश्चिम रेलवे के बारे में एक महत्वपूर्ण विषय को उठाने की अनुमति दी है, इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। पश्चिम रेलवे का 60 प्रतिशत नेटवर्क गुजरात में होता है। जहां तक आमदनी की बात है, सरकारी राजस्‍व की बात है, चाहे वह सवारी राजस्‍व हो या भाड़ा राजस्‍व हो, गुजरात का इसमें बहुत अहम योगदान है। पश्चिम रेलवे का नेटवर्क गुजरात के अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से गुजरता है।मैं आपके माध्यम से सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूं कि पश्चिम रेलवे का हैडक्वार्टर जो मुम्बई में है, उसके लिए अगर अहमदाबाद का स्थान लिया जाये, तो अहमदाबाद पश्चिम रेलवे के मध्‍य पड़ता है। इस बारे में गुजरात सरकार ने समय-समय पर  केन्द्र सरकार और रेलवे विभाग का ध्यान आकर्षित किया है। उन्हें इस बारे में कई पत्र लिखे हैं। गुजरात सरकार ने भी अहमदाबाद में मुख्‍यालय बनाने के लिए जमीन आबंटन की तत्परता दिखाई है। अतः मेरी आपसे प्रार्थना है कि सरकार पश्चिम रेलवे के मुख्‍यालय को अहमदाबाद में स्थापित करे।

उपाध्यक्ष महोदय, चावल निर्यात करने में भारत दूसरे नम्बर पर आता है। चीन के बाद भारत ही एक ऐसा देश है, जो सबसे ज्यादा चावल निर्यात करता है, जबकि सबसे ज्यादा चावल खरीदने वाला देश ईरान है। जब हिन्दुस्तान में किसान धान की फसल बोता है और बाजार में बेचने जाता है, उस समय ईरान आयात पर प्रतिबंध लगा देता है क्योंकि उसी समय ईरान में भी फसल होती है। वह अपने देश के किसानों की फसल को सुरक्षित करने के लिए ईरान आयात पर प्रतिबंध लगा देता है। इस कारण हिन्दुस्तान के किसानों की धान का मूल्य लगातार गिरता जा रहा है।

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपका ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूं कि वर्ष 2014 में चावल का मूल्य 2013 रुपये क्विंटल की अपेक्षा एक हजार रुपये क्विंटल हो गया, यानी 45 परसेंट भाव कम हो गया है, जिससे राजस्थान के कोटा, बूंदी और हरियाणा, पंजाब के किसानों को धान सस्ती दर पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इस संबंध में मंत्री महोदय ने ईरान से बात की है। मेरा निवेदन है कि सरकार तुरंत प्रभाव से बात करे। ईरान आयात पर प्रतिबंध हटाये, ताकि हिन्दुस्तान के किसानों की फसल उचित मूल्य पर निर्यात करके उनके मूल्य को बढ़ाया जा सके।

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, तीन महीने बाद जब ईरान आयात पर प्रतिबंध खोलेगा, तब तक किसान की धान तो बाजार में बिक चुकी होगी, लेकिन निर्यात और निर्यात करने वाले व्‍यापारी उन किसानों की फसल को सस्ता लेकर फिर महंगे दामों पर बेचेंगे। मेरी सरकार से मांग है कि किसानों को सुरक्षित करते हुए तुरंत प्रभाव से ईरान से बात करके आयात पर प्रतिबंध हटाये और किसान को सुरक्षित मूल्य मिले, इसका इंतजाम करे। धन्यवाद।//483//

डिक्‍टेशन-6

उपाध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री द्वारा लाये गये श्रम विधि (संशोधन) विधेयक, 2011 के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। जिस प्रकार से दुनिया बदल रही है, वर्तमान समय ग्लोबलाइजेशन एवं लिब्रलाइजेशन का युग है। आज भारत को एक महान राष्ट्र बनाने के लिए श्रमिक और प्रबंधक के रिश्तों में सुधार बहुत जरूरी है। इस बात की आवश्यकता भारत के संविधान निर्माताओं ने भी की थी और संविधान की जो प्रिएम्बल है उसके अंदर भी इस बात का प्रावधान किया गया था कि हमारे देश के जो लेबर क्लास के लोग हैं, हम उनके हितों की रक्षा करेंगे। उसी बात को आगे रखते हुए संविधान निर्माता बाबा साहब डाक्टर भीमराव अम्बेडकर ने संविधान की धारा में यह जीवन जीने एवं शोषण के खिलाफ लिखने का अधिकार की व्यवस्था की और समय-समय पर श्रम सुधार के बहुत-से कानून बनाये गये। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी वर्ष 1919 से यह सिलसिला शुरू हुआ। संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी इस विषय में बहुत से कानून बनाये। आज जो मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार बनी है, उसका विज़न बिल्कुल क्लियर है। हम चाहते हैं कि जो नियोक्ता है, जो नियोक्‍ता है और जो कर्मचारी हैं, वे एक-दूसरे को, एक-दूसरे के खिलाफ न समझते हुए, भारत के निर्माण में अपनी जिम्मेवारी को समझें और इस प्रकार के रिश्ते आपस में डेवलप करे, जिससे राष्ट्र उन्नति की ओर जाए। उन्हीं बातों को रखते हुए ये परिवर्तन आएंगे। हमारी सरकार इस बात के बिल्कुल खिलाफ है कि कोई एक पक्ष अन्‍वेषण करते रहे और दूसरा पक्ष उसको सहता रहे। इन सबके खिलाफ भी एक पारदर्शी योजना बनाने के अंतर्गत ही यह बिल लाया गया है।

महोदय,एक्ट में पहले से यह प्रावधान है कि तीन सदस्यों में से एक प्रधानमंत्री,दूसरा लोक सभा में विपक्ष के नेता और तीसरा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा नामित कोई अन्य न्यायाधीश मिल कर सी0बी0आई0 के निदेशक की नियुक्ति करेंगे। परन्तु सरकार ने सोलहवीं लोक सभा के गठन के बाद एक अलग ही नियम बना कर दस प्रतिशत के आंकड़े का जो खेल खेला है,उसी के परिणामस्वरूप इस बिल को लाने की आवश्यकता हुई है। अंततोगत्वा सदस्य तो कांग्रेस पार्टी का ही होगा।

दूसरा,सरकार ने इस प्रक्रिया के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की है कि सेवानियुक्ति के कितने दिनों पहले यह प्रक्रिया आरम्भ की जाएगी?यह भी इस बिल में प्रावधान होना चाहिए।

तीसरा, सरकार अब यह व्यवस्था कर रही है कि कोई सदस्य अनुपस्थित है या उसकी सदस्यता कमेटी में नहीं है तो भी सी0बी0आई0 के निदेशक की नियुक्ति सरकार कर लेगी, यह तो विरोधाभास लगता है। जब तीन सदस्यों का नियम है तो यह पूर्णरूपेण प्रावधान हो कि तीनों सदस्यों की उपस्थिति में और रज़ामंदी से उनके द्वारा सी0बी0आई0 के निदेशक की नियुक्ति की प्रक्रिया पूर्ण हो। आशा है कि सरकार इन बिंदुओं का ध्यान रखेगी।//462//

डिक्‍टेशन-7

उपाध्यक्ष महोदय, जहां तक इस विधेयक और विपक्ष का सवाल है, आप जिस तरीके से बिलों में लगातार कुछ न कुछ नये संशोधन लाकर जिस तरीके से विपक्ष को नजरअंदाज करते जा रहे हैं, यह सरकार की सेहत के लिए और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए उचित नहीं है। हम यह जरूर चाहेंगे कि आप जिन बिलों को आज जिस संशोधन के साथ लाना चाहते हैं, उसमें यदि आप बहुत मजबूत है, निश्चित रूप से आप बहुत सशक्त और ताकतवर हैं, आप देश बनाना चाहते हैं, फिर आप कमजोर विपक्ष से डरते क्यों हैं। क्यों नहीं आप कमजोर विपक्ष को और मजबूत करके अपनी ताकत को मजबूत करते। मुझे केंद्रीय अन्‍वेषण ब्‍यूरो के बारे में कुछ ज्यादा नहीं कहना है कि यह देश, दुनिया और हर व्यक्ति इस बात को बोलता है कि केंद्रीय अन्‍वेषण ब्‍यूरो कौन सा विभाग है। अभी सुप्रीम कोर्ट में जो बातें केंद्रीय अन्‍वेषण ब्‍यूरो निदेशक के बारे में आई हैं, इसका क्या कारण है। यदि केंद्रीय अन्‍वेषण ब्‍यूरो इतना मजबूत है तो लोकपाल जैसे बिल को लाने की बात क्यों आई और इतने दिन अन्ना हजारे ने इस देश में जिस तरीके से आंदोलन किया, उन्हें लगातार इतने बड़े आंदोलन में बैठने की जरूरत नहीं पड़ती।

उपाध्यक्ष महोदय, एको हम द्वितीय नास्ति, इस सरकार की स्थिति भस्मासुर वाली होती जा रही है। माननीय मंत्री जी हमारे बड़े भाई जैसे हैं। जब-जब किसी को शक्ति मिलती है तो शक्ति का दुरूपयोग इस कदर होता है। हम सिर्फ दो-तीन बातें आपसे कहना चाहते हैं। यह जो सरकारी संस्था है, आज तक हम उस सरकारी संस्था को बहुत सुंदर नहीं बना पाये हैं।  हमारी गुणवत्ता उन सरकारी संस्थाओं को बनाने में नहीं लगी है और अब नए-नए तरीके से अन्य सरकारी संस्थाओं को आप अधिकारियों के हाथों में देते जा रहे हैं। आखिर क्या कारण है कि “बुद्धम् शरणम् गच्छामि’, जो आते हैं सिर्फ अधिकारियों को “बुद्धम् शरणम् गच्छामि’ इस देश में किया जाता है। क्या अन्य कोई ऐसी संस्था, अन्य कोई ऐसी सामाजिक संस्था वाले लोग इस देश में नहीं हैं, जिनको सुविधाजनक बनाया जाए और उनको लाकर संस्थाओं को बहुत सुन्दर बनाया जाए।

दूसरी चीज, यह जो बार-बार कुछ लोगों की ही बात आती है, क्या इस देश में सुभाष चन्द्र बोस, भगत सिंह, महात्मा फूले, पेरियार, बाबू वीर कुंवर सिंह, राष्ट्रकवि लोहिया, डा. अम्बेडकर, सरदार पटेल, जैसे लोग नहीं हैं, जिनके नामों से कुछ भी खोला जा सकता है? क्या अन्य चीजें नहीं हो सकती हैं? निश्चित रूप से पंडित जवाहरलाल नेहरू जी की बात आई, वहां वे रहे हैं, वे फूलपुर से चुनाव लड़े हैं, उनका संविधान में योगदान है, उसके बारे में मुझे कुछ कहना नहीं है, लेकिन इन सारी महान विभूतियों के बारे में, हमारे राष्ट्र कवि रविन्द्र नाथ टैगोर हैं। मैं टैगोर जी की बात कर रहा हूं। मैं उन्हीं की बात कर रहा हूं। मेरे संदर्भ और मेरी भावना को समझिए। मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि सरकार जिस किसी के नामों को लाए, अटल बिहारी वाजपेयी जी के नाम को लाए, मुझे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन देश में अन्य विभूतियां भी हैं – नानक भी हैं, कबीर भी हैं, गुरूगोविन्द सिंह जी भी हैं, इस देश में बहुत सारे लोग हैं, बुद्ध भी हैं, महावीर भी हैं, सबके के नामों से हो, मेरा आपसे आग्रह है कि निश्चित रूप से इन चीजों पर जरूर ध्यान दिया जाए। //551//

डिक्‍टेशन-8

महोदय, फतेहपुर सीकरी में अंतर्राष्ट्रीय  हवाई अड्डा नहीं है, वहां से आगरा 35 किलोमीटर की दूरी पर है। आगरा में 40 साल से यह मांग उठती चली आ रही है कि वहां अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाया जाए, मगर जमीन की कमी के कारण, जमीन नहीं मिलने के कारण, वहां पर अभी तक अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा नहीं बना है। मेरा आपसे अनुरोध है कि फतेहपुर सीकरी तीन राज्यों को जोड़ता है, मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश, जहां हमलोग खुद हैं, अगर यहां पर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा बनेगा तो निश्चित तौर से वहां से बहुत राजस्व की प्राप्ति होगी। आज फतेहपुर सीकरी में 40 हजार विदेशी पर्यटक और देसी 3 लाख पर्यटक आते हैं। इनसे लगभग 15 करोड़ रुपए की वार्षिक आय होती है। ताजमहल यहां से 25 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां करीब 70 लाख विदेशी पर्यटक आते हैं और लगभग 35 लाख देसी पर्यटक आते हैं जिससे सरकार को 70-80 करोड़ रुपए राजस्व के रूप में मिलते है।  फतहपुर सीकरी अकबर की राजधानी रही है। फतहपुर सीकरी का बुलंद दरवाजा विश्व में सबसे ऊंचा दरवाजा है। फतहपुर सीकरी सलीम चिश्ती की दरगाह है  लाखों विदेशी पर्यटक उसे देखने के लिए  एवं पूजा करने के लिए आते हैं। फतहपुर सीकरी से भरतपुर पक्षी अभ्‍यारण्‍य तकरीबन 15 किलोमीटर की दूरी पर है जिसे लाखों पर्यटक देखने आते हैं। फतहपुर सीकरी से मध्य प्रदेश का 180 किलोमीटर ग्वालियर हवाई अड्डा है। फतेहपुर सीकरी से दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे की दूरी 280 किलोमीटर है, फतेहपुर सीकरी से लखनऊ हवाई अड्डे की दूरी करीब 500 किलोमीटर है, फतेहपुर सीकरी से जयपुर हवाई अड्डा भी करीब 280 किलोमीटर दूर है अतः यह उपयुक्त और एक ऐतिहासिक जगह है और पर्यटकों को काफी दूरी तय कर हवाई यात्रा करनी पड़ती है।

महोदय, मैं आपके माध्यम से सरकार का ध्यान एक अति महत्वपूर्ण विषय की ओर आकृष्ट करना चाहता हूं। पश्चिम उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से हजारों की संख्या में वकील तथा विभिन्न जन-संगठनों के प्रतिनिधि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की पश्चिम उत्तर प्रदेश में खंडपीठ को स्थापित किए जाने की वर्षों पुरानी मांग को लेकर आज एक बार फिर संसद भवन के सम्मुख उपस्थित हुए थे। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ मेरठ में स्थापित करने की मांग निरंतर उठायी जाती रही है। मैंने पहले भी अनेक बार इस मांग को सदन में, तथा माननीय मंत्री जी के सम्मुख उठाया है। परन्तु, काल बाह्य नियमों एवं व्यवस्थाओं में खंडपीठ स्थापना के निर्णय की प्रक्रिया फंस कर रह जाती है। इसके परिणामस्वरूप पश्चिमी उत्तर प्रदेश के करोड़ों वादकारी आज भी सस्ते एवं सुलभ न्याय से वंचित हैं। इस अन्यायपूर्ण स्थिति के कारण वर्षों तक वकील की फीस देने तथा इलाहाबाद आने-जाने व ठहरने-खाने का इंतजाम करने में ही इस क्षेत्र के वादियों के खेत व मकान तक बिक जाते हैं।

मेरा आपके माध्यम से सरकार से, तथा विशेषकर आदरणीय प्रधान मंत्री जी से निवेदन है कि वे उत्तर प्रदेश की संपूर्ण न्यायिक व्यवस्था की समीक्षा करते हुए उसमें व्याप्त जड़ता को समाप्त करने का कष्ट करें तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को न्याय दिलाने हेतु मेरठ में इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ की स्थापना कराने की कृपा करें।//512//

डिक्‍टेशन-9

उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से सदन और सरकार का ध्यान डेंगू जैसे वॉयरस की तरफ दिलाना चाहता हूं। मध्य प्रदेश के तीस जिले उससे प्रभावित हैं। जो मौते हुई हैं, वह 16 के आसपास हैं। उनमें पांच मेरे लोक सभा क्षेत्र के, दमोह लोक सभा क्षेत्र के सागर के देवरी विधानसभा में हुई हैं।

उपाध्यक्ष महोदय, मुझे सिर्फ तीन बातें बड़ी जिम्मेदारी के साथ कहनी हैं। सरकार को इस बात पर चिन्ता करनी पड़ेगी कि जो डेंगू की किट है, उसकी प्रमाणिकता पहली बार साबित हुई है कि जिन सरकारी किटों के आधार पर डेंगू को डिटेक्ट नहीं किया जा सका, उन्हीं लोगों की मौतें हुई हैं। इसलिए मुझे लगता है कि सरकार को इस बात पर जरूर चिन्ता करनी चाहिए, क्योंकि राज्य के स्तर पर एक जो एंटी वॉयरस केन्द्र होता है, वह भी वहां पर सफल नहीं रहा है। इसलिए कोई एक गरीब आदमी या कोई छोटा-मोटा किसान एक बार जब गया, उसकी प्लेटलेट्स कम होती हैं, उसका 40 हजार, 60 हजार से ज्यादा का खर्च आया और उसके बाद वे नहीं रहे। मुझे लगता है कि ये बड़ी भयानक परिस्थिति है। इसलिए हम सब को सामूहिक रूप से इस बात की चिन्ता करनी पड़ेगी कि क्या वास्तव में देश के स्वास्थ्य विभाग के पास अभी भी डेंगू की उतनी प्रमाणिक और पर्याप्त किट मौजूद नहीं है? यह परिस्थिति हम स्वीकार न करें, लेकिन मध्य प्रदेश की सरकार ने स्वीकार किया है। उसमें अगर खाली मेरे ही क्षेत्र से पांच लोगों की मौत होती है तो मैं सरकार से चाहूंगा कि इस बारे में जरूर चिन्ता करें। जैसे अभी हमारे केरल के मित्र ने कहा है, हमें इन बातों की चिन्ता करनी पड़ेगी कि क्या वह प्रमाणिक किट अगर हम बाहर से मंगाते हैं तो उनकी गुणवत्ता ठीक है या नहीं। अगर हम यहां पर इज़ात करने के बावजूद भी उस पर पूरी तरह से कारगर नहीं हुए हैं तो उसके बारे में भी सरकार को ध्यान देना चाहिए। बहुत-बहुत धन्यवाद।

मैं आपके प्रति आभार व्यक्त करता हूं। महोदय, भारत किसानों का देश है। आज किसानों को उचित दाम न मिलने के कारण और महंगी खेती के कारण वे आत्महत्या करने के लिए विवश हैं। आज बहुतेरे किसान आत्महत्या कर रहे हैं। देश के विभिन्न राज्यों में खासकर धान की फसल की कटाई एक माह पहले से ही प्रारंभ हो चुकी है, किन्तु अनेक राज्यों में अभी तक राज्य सरकारों द्वारा धान के क्रय केन्द्र नहीं खोले गए हैं और न ही लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। विशेषकर बिहार में बहुतेरे किसानों को गत वर्ष पैक्स द्वारा खरीदे गए धान के समर्थन मूल्य का अभी तक भुगतान नहीं किया गया है, जिससे किसानों में काफी क्षोभ है। बिहार में शाहाबाद, जो धान का कटोरा कहलाने वाला क्षेत्र है, जिसके अंतर्गत हमारा संसदीय क्षेत्र बक्सर भी आता है, आज फसल का समर्थन मूल्य नहीं मिलने एवं महंगी खेती के कारण लोग कटोरा लेकर भीख मांगने की स्थिति में आ गए हैं।

महोदय, इसके अलावा बिहार सरकार द्वारा लाभांश मूल्य की राशि की घोषणा पिछले वर्ष धान क्रय के अंतिम चरण में की गयी थी जिसके पूर्व में किसानों द्वारा बेचे गए धान के लिए लाभांश मूल्य का भुगतान नहीं किया गया था, जबकि सरकार द्वारा यह आश्वासन दिया गया था कि पूर्व के भी विक्रेता किसानों को घोषित लाभांश मूल्य का भुगतान किया जाएगा, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हो पाया है।//554//

डिक्‍टेशन-10

माननीय उपाध्यक्ष जी, देश के गंभीर विषय पर आपने मुझे बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपका धन्यवाद देता हूं। देश में पूंजीपति शिक्षा माफियाओं द्वारा छात्रों का शोषण कोचिंग संस्थाओं द्वारा हो रहा है। गरीब मध्यम वर्ग के छात्र किसी तरह से अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए दिल्ली आते हैं। यहां मकान मालिक एक कमरे में चार छात्र रखते हैं और करीब चार हजार, आठ हजार या  दस हजार रुपया एक छात्र से लिया जाता है और प्रत्येक महीने पैसा बढ़ा दिया जाता है। पुलिस द्वारा परेशान करके जबरदस्ती पैसे लिए जाते हैं अन्यथा उन्हे निकाल दिया जाता है, बिजली, पानी काट दिया जाता है। बच्चों पर धमका कर, लाठी से पीट कर पैसे लिए जाते हैं। खास तौर से उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्‍तर के छात्रों की स्थिति बहुत भयानक है। भारत सरकार, दिल्ली सरकार ने पहले भी इन मामलों की तरफ बहुत ध्यान दिया था और कहा था कि बच्चों के साथ इस तरह की नाइंसाफी नहीं होगी। बाहर से आकर पढ़ने वाले बच्चों के लिए दर निर्धारित की गई थी लेकिन मकान मालिक माफिया उसका पालन नहीं कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एक कानून बना जिसमें यह तय किया गया कि मकान की क्या गुणवत्ता, स्थिति होगी और कितनी फीस होगी। एक कमरे में मात्र दो छात्र रखे जाएंगे जबकि एक कमरे में छः-सात छात्रों को रखा जाता है और जबरदस्ती उनसे चार हजार, आठ हजार या  दस हजार रुपया रुपए वसूले जाते हैं।

शिक्षा के मामले में सुप्रीम कोर्ट और सरकार ने दिशा-निर्देश हैं कि 20 से 40 छात्रों से ज्यादा किसी कोचिंग संस्था में नहीं पढ़ा सकते और क्या फीस होगी, यह भी तय है। आज स्थिति यह है कि फीस भी अत्यधिक ली जाती है और एक कोचिंग संस्था में एक पीरियड में 400 या 500 विद्यार्थियों को पढ़ाया जाता है। मैं मांग करता हूं कि जो आदेश भारत सरकार और सुप्रीम कोर्ट का है, शिक्षा की गुणवत्ता का जो नियम है, उसके मुताबिक कोचिंग संस्था में शिक्षा मिले और उचित फीस ली जाए। दिल्ली में छात्र-छात्राओं पर अत्याचार हो रहा है। मेरी मांग है कि मंत्री महोदय इसमें दखल दें। दिल्ली में मकान मालिकों की स्थिति देखें और बिहार के बच्चों को बचाएं।

परम सम्माननीय उपाध्यक्ष महोदय, सबसे पहले मैं आपको हार्दिक धन्यवाद अर्पित करना चाहूंगा कि आपने मुझे राजस्थान के किसानों के बारे में बोलने का सुअवसर दिया। मैं यहां राजस्थान, विशेष रूप से पश्‍चिमी राजस्थान का एक महत्वपूर्ण विषय उठाना चाहता हूं। वहां पर बारिश वास्तव में देरी से होती है या बारिश का अंतराल बहुत ज्यादा हो जाता है, जिससे पांच वर्षों में से तीन वर्ष फसलें खराब हो जाती हैं। फसलें खराब होने के कारण काश्तकारों के लिए एक नयी स्कीम  आयी है। हमारे वहां यह कहावत है कि आपके गाय के एक सींग पर बारिश हो रही है  तो दूसरा सींग सूखा रह रहा है, यानी एक गांव से दूसरे गांव में बहुत अंतर आ जाता है। तहसील मुख्‍यालय यदि तहसील के एक कोने में स्‍थित है और पूरा तहसील दूसरी तरफ में है तो इस कारण मौसम में सही रिपोर्टिंग नहीं हो पाती है। यदि तहसील मुख्‍यालय पर अच्छी बारिश दर्ज हो गयी तो बाकी तहसील के गांव में जितनी भी खराबी हो, वे अकेले परेशान नहीं होंगे,  किसानों को जो सबसे बड़ी दिक्कत आ रही थी, उसे मैं आपके मार्फत माननीय कृषि मंत्री जी को बताना चाहता हूं। //559//

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